Saturday, May 8, 2021

Suptvajrasana Steps benefits and precautions |सुप्तवज्रासन तरीका लाभ और सावधानियाँ

 Suptvajrasana

Meaning of Suotvajrasana | Other Name of Suptvajrasana


Supt means Sleeping or Laying

Vajra means Thunderbolt        ( Weapon of Lord Indra)

Asana means posture

So Suptvajrasana means a posture which is like thunderbolt and done in laying position.The other name of Suptvajrasana is The Thunderbolt Posture,Recline Thunderbolt Posture and Sleeping Thunderbolt Posture etc.

Precautions to be taken while doing Suptvajrasana/Side effects of Suptvajrasana

The precautions to be taken while doing Suptvajrasana are as under :-

1.    The people with lower back pain should avoid doing Suptvajrasana.

2.     The people suffering with cervical sponndylosis and osteo asthritis should avoid doing Suptvajrasana.

3.     The people with disc problem should avoid doing Suptvajrasana.

4.     Pregnant women must not do Suptvajrasana.

5.     Suptvajrasana should be done 2-3hrs after meal or in an empty stomach.

6.     Suptvajrasana should not be done on a hard surface.

Preparations before doing Suptvajrasana

Photo by Elly Fairytale from Pexels

Before practicing Suptvajrasana one should practice following yoga poses :-

1.     Vajrasana

2.     Matasyasana


Steps of doing Suptvajrasana

1.     Sit in vajrasana.

2.     Bend back with the support of both of your elbows.

3.     Slowly bring back the head to the floor.

4.     Lay down on the floor by your back.

5.     Put your palms on your thighs.

6.     Now raise your head to make an arc on your back.

7.     Breathe normally.

8.    One should go from step 7 to 1 in reverse order to release from the Suptvajrasana pose.

Benefits of Suptvajrasana

1.     Suptvajrasana tones spinal nerves.

2.     Suptvajrasana increase flexibility.

3.     Suptvajrasana increase the oxygen intake of lungs.

4.     Suptvajrasana relives from constipation and helps in many stomach ailments.

5.     Suptvajrasana gives massage to inner organs like heart,kidneys and lungs etc.

6.     Suptvajrasana increases sexual energy.

7.     Suptvajrasana helps to prevent from ulcer and acidity.

8.     Suptvajrasana strengthen the feet arches.


Best time for doing Suptvajrasana

This Asana should be done in early hours of morning and 10 minutes before sunset in an empty stomach.

Duration of Suptvajrasana

Suptvajrasana can be practiced from 30 seconds to 15-30 minutes.But time should be increades gradually

सुप्तवज्रासन के बारे में हिन्दी में पढ़ें

सुप्तवज्रासन  का अर्थ | सुप्तवज्रासन का अन्य नाम 


सूप्त का अर्थ है सोना या बिछाना

 वज्र का अर्थ है वज्र (भगवान इंद्र का हथियार)

 आसन का अर्थ है बैठने का तरीका

तो  सुप्तवज्रासन का मतलब एक आसन है जो वज्र के समान होता है और लेटने की स्थिति में किया जाता है।सुप्तवज्रासन का दूसरा नाम द थंडरबोल्ट आसन, रेकलाइन थंडरबोल्ट आसन और स्लीपिंग थंडरबोल्ट आसन है 

Suptvajrasana / Suptvajrasana के साइड इफेक्ट्स करते समय बरती जाने वाली सावधानियां 


 सुप्तवज्रासन करते समय बरती जाने वाली सावधानियां इस प्रकार हैं: - 

1. पीठ के निचले हिस्से में दर्द वाले लोगों को  सुप्तवज्रासन करने से बचना चाहिए। 

2. सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस और ऑस्टियो एस्ट्राइटिस से पीडि़त लोगों को सुप्तवज्रासन करने से बचना चाहिए। 

3. डिस्क की समस्या से ग्रस्त लोगों को सुप्तवज्रासन करने से बचना चाहिए। 

4. गर्भवती महिलाओं को सुप्तवज्रासन नहीं करना चाहिए। 5.सुप्तवज्रासन भोजन के बाद या खाली पेट 2-3hrs में करना चाहिए। 

6. कठिन सतह पर नहीं किया जाना चाहिए। 


 सुप्तवज्रासन करने से पहले की तैयारी 



सुप्तवज्रासन का अभ्यास करने से पहले व्यक्ति को निम्नलिखित योगासनों का अभ्यास करना चाहिए: -

 1. वज्रासन 

2. मत्स्यासन 

सुप्तवज्रासन करने के चरण 

1. वज्रासन में बैठें। 

2. अपनी दोनों कोहनी के सहारे पीछे झुकें।

 3. धीरे-धीरे सिर को फर्श पर वापस लाएं। 

4. अपनी पीठ के बल फर्श पर लेट जाएं।

5. अपनी हथेलियों को अपनी जांघों पर रखें। 

6. अब अपने सिर को अपनी पीठ पर एक चाप बनाने के लिए बढ़ाएं। 

7. सामान्य रूप से सांस लें।

8. चरण 7 से 1 तक उल्टा क्रम में करेम ताकि मुद्रा से मुक्ति हो सके। 

सुतवज्रासन के लाभ 

1. सुतवज्रासन रीढ़ की नसों को टोन करता है। 

2. सुप्तवज्रासन से लचीलापन बढ़ता है। 

3.  सुप्तवज्रासन फेफड़ों के ऑक्सीजन सेवन को बढ़ाता है। 

4.   सुप्तवज्रासन कब्ज से राहत देता है और पेट की कई बीमारियों में मदद करता है।

5.    सुप्तवज्रासन हृदय, गुर्दे और फेफड़ों आदि जैसे आंतरिक अंगों को मालिश देता है।

6.   सुप्तवज्रासन से यौन ऊर्जा बढ़ती है। 

7.   सुप्तवज्रासन अल्सर और एसिडिटी से बचाने में मदद करता है। 

8.  सुप्तवज्रासन पैरों की मेहराब को मजबूत करता है।

 सुप्तवज्रासन करने का सर्वोत्तम समय 

इस आसन को सुबह के शुरुआती घंटों और सूर्यास्त से 10 मिनट पहले खाली पेट में करना चाहिए। 

सुप्तवज्रासन की अवधि 

सुप्तवज्रासन का अभ्यास 30 सेकंड से 15-30 मिनट तक किया जा सकता है। लेकिन समय को धीरे धीरे बढ़ाएँ |

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