Saturday, June 5, 2021

शिवपंचाक्षरस्तोत्रम् || Cure For All Diseases

 शिवपंचाक्षरस्तोत्रम् || Cure For All Diseases



नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय

भस्माङ्गरागाय महेश्वराय ।

नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय

तस्मै नकाराय नमः शिवाय ||


Nagendrharaye trilochnaaye,

Bhasamangragaye maheshwaraye.

Nityayesudhaaye digambraaye ,

Tasmai nakaaraye namah shivaye .


सर्पों कि माला धारण करने बाले,        तीन नेत्रों बाले,

शरीर पर भस्म रमाने बाले महेश्वर |

नित्य शुद्ध दिशाओं के वस्त्र धारण करने बाले,

न कार स्वरूप शिव को नमस्कार है ||


He who is wearing garlands of snakes,he who have three eyes, he who has clax  all over the body. he who is wearing clothes of pure directions,  Salute to that Shiva,he who is represented by symbol of "na".


मन्दाकिनीसलिलचन्दनचर्चिताय

नन्दीश्वरप्रमथनाथमहेश्वराय ।

मन्दारपुष्पबहुपुष्पसुपूजिताय

तस्मै मकाराय नमः शिवाय ||


Mandakinisalilchandan charchitaye,

Nandeeshwarpramathnath maheshwaraaye.

Mandaarpushp bahupuwhp supujitaaye,

Tasmai makaaray namah shivaye.


गंगा जी को धारण करने बाले,      

  चंदन से अलंकृत,

नंन्दी जी के पूजित,प्रमथनाथ महेश्वर |मंदार जैसे कई फूलों से पूजित म स्वरूप शिव को नमस्कार है |


He whobis wearing Ganga ji, he who is embellished with sandalwood, he who is worshiped by Nandi ji, he who is Pramathanath Maheshwar . He who is worshiped by many flowers like mandar.

Salute to that Shiva,he who is represented by symbol of "ma".


शिवाय गौरीवदनाब्जबृंदाय

सूर्याय दक्षाध्वरनाशकाय ।

श्रीनीलकण्ठाय वृषध्वजाय

तस्मै शिकाराय नमः शिवाय ||


Shivaayegaureevadnabajbrindaaye,

Sooryay dakshadhwarnaaskaaye.

Srineelkhanthaaye vrishdhwajaaye,

Tasmai shikaaraaye namah shivaaye.


जो सूरज के समान हैं और माँ गौरी जी के मुख कमल को खुशी प्रदान करने बाले हैं,राजा दक्ष के घमन्ड को दूर करने बाले,कण्ठ में बिष धारण करने बाले,जिन का प्रतीक के रूप में बैल है, शि स्वरूप भगवान शिव को नमस्कार है |


 Hw who is like the sun and give hapiness to Maa Gauri , he who removed the pride of King Daksha, he who has blue throat , he who has a bull as a symbol, Salute to that Shiva,he who is represented by symbol of "shi".



वशिष्ठकुम्भोद्भवगौतमार्यमूनीन्द्र देवार्चित शेखराय ।

चन्द्रार्कवैश्वानरलोचनाय

तस्मै वकाराय नमः शिवाय ||


Vashishthkumbhodbhvgautmaaryamooneendr devaarchit sekhraay .

Chandrarkvaishvanarlochanaay,

tasmai vakaaraay namah shivaaye.


वशिष्ठ ,अगस्तय,गौतम आदि मुनियों और देवताओं के पूजित,ब्रहमाँड के मुकुट,जिन कि चंद्रमा,सूरज और अग्नि तीन आँखें हैं ,व स्वरूप भगवान शिव को नमस्कार है |


He who is worshiped by sages and deities like Vashistha, Agastya, Gautama etc.He whois the crown of the universe,he who has the moon, sun and fire as  three eyes.Salute to that Shiva,he who is represented by symbol of "va".



यज्ञस्वरूपाय जटाधराय

पिनाकहस्ताय सनातनाय ।

दिव्याय देवाय दिगम्बराय

तस्मै यकाराय नमः शिवाय ||


Yagya roopaaye,pinaak hastaay,

divayaay devaay digambaraay,

tasmai yakaaraay namah shivaaye.


यज्ञ स्वरूप ,जटाओं को धारण करने बाले ,जिन के हाथों में त्रिशूल है ,जो सनातन हैं |जो दिव्य हैं ,तेजोमय हैं और चारों दिशाएँ जिन के वस्त्र हैं ,य स्वरूप उन भगवान शिव को नमस्कार है |


The Yajna form, one who holds the Jatas(long hairs), who has the trident in his hands, who is eternal.He who is divine, bright and all the four directions are whose clothes ,Salute to that Shiva,he who is represented by symbol of "ya".


पञ्चाक्षरमिदं पुण्यं यः पठेच्छिवसंनिधौ ।

शिवलोकमावाप्नोति शिवेन सह मोदते ||


Panchaksharmidam punyam ya,

pathechivasanidhau.  Shivlokamvapnautee shiven sah modate.


इस पंचाक्षर का पाठ जो शिव के समीप करते हैं ,वे शिव के निवास को प्राप्त करेंगे और शिव के साथ आन्नदित रहेंगे ।


Those who recite this Panchakshar in front os Shiva, They will obtain Shiva's abode and enjoy with Shiva.


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