Monday, March 22, 2021

नेत्र रोग नाशक मंत्र || MANTRA TO CURE EYE DISEASE || अक्ष्युपनिषद्

नेत्र रोग नाशक मंत्र || MANTRA TO CURE EYE DISEASE

अक्ष्युपनिषद्

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ऊँ नमो भगवते श्री सूर्यायाक्षितेजसे नमः | ऊँ स्वेचराय नमः | ऊँ महासेनाय नमः |ऊँ तमसे नमः |ऊँ रजसे नमः | ऊँ सत्वाय नमः |ऊँ असतो मा सद गमय | तमसो मा ज्योतिर्गमय | मृत्योर्माsमृतम् गमय | हंसो भगवाञ्छुचिरूपः अप्रतिरूपः |विश्वरूपं घृणिनं जातवेदसं हिरण्यमयं ज्योतीरूपं तपतम् | सहस्ररश्मिः शतद्या वर्तमानः पुरः प्रजानामुदयत्पेण सूर्यः |ऊँ नमो भगवते श्री सूर्यायादित्यायादितेजसेsहोsवाहिनि वाहिनि स्वाहेति |


हिन्दी में अनुवाद

नेत्र रोग नाशक मंत्र
अक्ष्युपनिषद्

चक्षुओं कि ज्योति (आँखों को तेज देने वाले ) भगवान सूर्य को नमस्कार है |अपनी इच्छा से भ्रमण करने वाले भगवान सूर्य को नमस्कार है |महान सेना के अधिपति भगवान सूर्य को नमस्कार है |तमोगुण रूप में भगवान सूर्य को नमस्कार है| रजोगुण रूप में भगवान सूर्य को नमस्कार है |सत्वगुण रूप में भगवान सूर्य को नमस्कार है |हे सूर्य नारायण आप मुझे असत्य से सत्य कि ओर ले चलिए |अंधकार से प्रकाश कि ओर ले चलिए |मृत्यु से अमृत कि ओर ले चलिए |हे भगवान सूर्य आप शुचिरूप(मनमोहक) हैं,आप अप्रतिरूप (अतुलनीय) हैं|असंख्य रश्मियों वाले, सर्वग्य,स्वर्ण के समान और ज्योतिरूप में प्रदिप्त रहने वाले हैं |ये सूर्य भगवान हजारों किरणों से सुशोभित,हजारों रूपों में सभी के समक्ष उदित हो रहे हैं |नेत्रों के प्रकाश आदित्यनंदन भगवान सूर्यनारायण को नमस्कार है |दिन का भार वहन करने वाले विश्व वाहक सूर्यनारायण पर मेरा सब कुछ न्योछावर है |


यह अक्ष्युपनिषद् भविष्य पुराण से लिया गया है तथा इसके द्वारा भगवान साड्.गकृति जी ने सूर्यनारायण जी कि स्तुति कि है|जो भी प्राणि इस अक्ष्युपनिषद् का रोज पाठ करता है उसे नेत्र रोग नहीं हो सकता और उस के कुल में कोई अन्धा नहीं होता |आठ ब्राह्मणों को इस का ग्रहण करवा देने पर इस विद्या कि सिद्धि होती है |


Translation in English 

 Akshyupanishad 

 salutations to Lord Surya who is light of the eyes. Salutations to Lord Surya who travels at his own will. Salutations to the Lord Surya who has a great army . In the form of angryness, salutations to Lord Surya. In the form of restfullness,salutations to Lord Surya. In the form of virtue, salutations to Surya. O Surya Narayana, lead me from untruth to truth. Lead me from darkness to light,from death to nectar.Lord Surya you are pure (enchanting), you are immortal(incomparable). Lord Surya you have innumerable jewels, you are omniscient, like gold and illuminated in the form of light. The light of the eyes ,son of Aditya, the world carrier who carries the weight of the day, Lord Surya my everything is sacrificed on you.


This Akshyupanishad is derived from the Bhavishya Purana and through it Lord Sadgkriti ji has praised Suryanarayana ji. Anyone who recites this Akshyupanishad daily cannot have eye disease and there is no blindness in the family. By getting eight Brahmins to receive it, this knowledge is attained.




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